कोरबा। एचटीपीपी कोरबा पश्चिम संयंत्र की 210 मेगावाट की 4 इकाइयों से वर्ष 2030 तक बिजली उत्पादन किया जाएगा। केन्द्र सरकार ने 40 साल पुरानी बिजली इकाईयों को वर्ष 2030 तक ही उत्पादन जारी रखने का निर्णय लिया है। ऐसे में इस अवधि के बाद संयंत्र के पहले चरण के विस्तार की 500 मेगावाट की एक इकाई ही उत्पादन में रह जाएगी।
एचटीपीपी संयंत्र के दूसरे चरण के विस्तार का 1320 मेगावाट का नया पॉवर प्लांट लगेंगे। इसकी आगे की प्रक्रिया पर्यावरणीय अनुमति के कारण अटकी हुई है। अनुमति मिलने के बाद टेंडर की प्रक्रिया को पूरा कर 660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल यूनिट लगाने भौतिक रूप से आधारशिला रखेंगे। इनमें से एक इकाई को साल 2029 तक बिजली उत्पादन में लाने का है।
साल 2030 तक 840 मेगावाट क्षमता की एचटीपीपी कोरबा पश्चिम के 210 मेगावाट की चार पुरानी इकाईयों से उत्पादन बंद हो जाएगा। इसके पहले दूसरे चरण के विस्तार की एक इकाई से उत्पादन शुरू करने का है, लेकिन पर्यावरणीय अनुमति मिलने में देरी से एक यूनिट के कमीशनिंग का कार्य आगे बढ़ सकती है। ऐसी संभावना जताई जा रही है।
इन सबके बीच गुरुवार को कोरबा पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से बिजली कर्मचारी संघ – महासंघ के पदाधिकारियों ने मुड़ापार स्थित हेलीपेड पर मिलकर एचटीपीपी के दूसरे चरण के विस्तार से प्रस्तावित संयंत्र को बिरसामुंडा या शहीद वीरनारायण सिंह के नाम पर करने और निर्माण कार्य का भौतिक रूप से जल्द भूमिपूजन कराने की मांग की है।
साथ ही एचटीपीपी कोरबा पश्चिम के 840 मेगावाट की पुरानी इकाइयों के बंद होने की ओर भी ध्यान आकृष्ठ कराया है। मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ -महासंघ ने बिजली कंपनी में पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग की है।
संगठन के महामंत्री नवरतन बरेठ ने बताया कि तकनीकी कर्मचारियों को 3 फीसदी तकनीकी भत्ता, संविदा कर्मियों के नियमितीकरण, बिजली कंपनी के खाली पदों पर भर्ती, ठेका कर्मियों की जॉब सिक्योरिटी 62 वर्ष करने की मांग पर भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ठ कराया है।








