बिलासपुर, 05 अगस्त 2025: पलारी ब्लॉक के लच्छनपुर मिडिल स्कूल में मिड-डे मील में 83 बच्चों को कुत्ते का जूठा खाना परोसने का मामला तूल पकड़ चुका है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे “गंभीर लापरवाही” और “अमानवीय” करार दिया है। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को 19 अगस्त 2025 तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
यह घटना 28 जुलाई 2025 को हुई, जब स्कूल में 83 बच्चों को वह खाना परोसा गया, जिसे एक आवारा कुत्ते ने पहले जूठा कर दिया था। घटना के बाद बच्चों को एंटी-रेबीज वैक्सीन दी गई, लेकिन बच्चों की संख्या को लेकर आंकड़ों में असमानता पाई गई, जिसमें कहीं 78 तो कहीं 83 बच्चों का उल्लेख है।
हाईकोर्ट ने अपनी कड़ी टिप्पणी में कहा, “मिड-डे मील कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि बच्चों की गरिमा और जीवन से जुड़ा मुद्दा है। कुत्ते का जूठा खाना परोसना प्रशासनिक विफलता और अमानवीय कृत्य का उदाहरण है।” कोर्ट ने राज्य सरकार से चार प्रमुख बिंदुओं पर जवाब मांगा है:
क्या सभी प्रभावित बच्चों को समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन दी गई?
जिम्मेदार शिक्षकों और स्व-सहायता समूह के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?
प्रभावित बच्चों को मुआवजा प्रदान किया गया या नहीं?
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2025 को निर्धारित की है। यह घटना छत्तीसगढ़ में व्यापक आक्रोश का कारण बन गई है, और जनता के साथ-साथ अदालत ने भी बच्चों की सेहत और सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त न करने का स्पष्ट संदेश दिया है। इस मामले में सरकार की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।








