कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कोरबा जिले के भैसमा धान उपार्जन केंद्र में किसानों का शोषण जारी है। शासन ने साफ कहा है कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों से किसी भी प्रकार का श्रम कार्य (हमाली) नहीं करवाया जाएगा, लेकिन यहां मंडी प्रभारी द्वारा नियमों को दरकिनार कर किसानों से बोरा पलटाई, उठाई-पटकाई और अन्य मजदूरी के काम करवाए जा रहे हैं।
शासन की व्यवस्था के मुताबिक, हमालों की नियुक्ति और उनका भुगतान मंडी प्रभारी की जिम्मेदारी है, जिसका खर्चा राज्य सरकार वहन करती है। इसके विपरीत भैसमा केंद्र में किसानों को ही यह काम करने को मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनके बीच भारी रोष व्याप्त है।
इतना ही नहीं, धान की खरीद में निर्धारित मानक 40 किलो प्रति बोरा के बजाय 41 किलो 700 ग्राम से 800 ग्राम तक वजन लिया जा रहा है। इस अतिरिक्त वजन से किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। एक किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम धान बेचने आते हैं, लेकिन मजदूरी भी करनी पड़ रही है। यह सुशासन नहीं, अन्याय है।”
यह मामला छत्तीसगढ़ में चल रहे धान उपार्जन अभियान (खरीफ विपणन वर्ष 2025-26) के दौरान हो रही अन्य अनियमितताओं को भी उजागर करता है, जहां कई जगहों पर किसानों से अवैध वसूली, हमाली चार्ज और अन्य शोषण की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। प्रशासन से अपेक्षा है कि भैसमा केंद्र में तत्काल जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों का विश्वास बहाल हो सके।
यदि यह मामला सच साबित होता है, तो यह शासन के “किसान हितैषी” दावों पर भी सवाल खड़े करेगा।








