कोरबा, 6 अगस्त 2025: कोरबा जिले के विश्व प्रथम आदिवासी शक्तिपीठ बुधवारी में विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में 7 से 11 अगस्त तक पांच दिवसीय भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देना और सामाजिक वैचारिक असमानता को दूर करना है। समापन समारोह 11 अगस्त को होगा, जिसमें प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
पांच दिनों तक विविध आयोजन
आयोजन की शुरुआत 7 अगस्त को होगी, जिसमें जिले के पांचों ब्लॉकों में सामान्य ज्ञान, भाषण, रंगोली, और चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। सभी प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे। 8 अगस्त को आदिवासी शक्तिपीठ में कबड्डी, रस्साकसी, फुगड़ी, और तीरंदाजी प्रतियोगिताएं होंगी। तीसरे दिन, 9 अगस्त को सामूहिक देवपूजन, कुर्सी दौड़, दीप प्रज्वलन, और आतिशबाजी का आयोजन होगा।
चौथे दिन, 10 अगस्त को मेडिकल कैंप, रक्तदान शिविर, 7 और 8 अगस्त की प्रतियोगिताओं का फाइनल, सांस्कृतिक नृत्य प्रतियोगिता, पारंपरिक आदिवासी परिधान प्रतियोगिता, कैरियर काउंसलिंग, उद्यमशीलता, और प्रेरक व्याख्यान का आयोजन होगा। अंतिम दिन, 11 अगस्त को सुबह 7 बजे मैराथन के साथ कार्यक्रम शुरू होगा, जिसके बाद मंचीय कार्यक्रम, सम्मान समारोह, कैरियर काउंसलिंग, प्रेरक उद्बोधन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, और क्विज होंगे। दोपहर में सामूहिक भोज, पारितोषिक वितरण, और अतिथियों का उद्बोधन होगा। संध्या में सामूहिक नृत्य और समापन समारोह आयोजित होगा।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
समापन समारोह की अध्यक्षता आदिवासी शक्तिपीठ के अध्यक्ष बी.एस. पैंकरा करेंगे। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में सांसद ज्योत्सना चरण दास महंत मौजूद रहेंगी। विशिष्ट अतिथियों में फूल सिंह राठिया (विधायक, रामपुर), प्रेमचंद पटेल (विधायक, कटघोरा), तुलेश्वर सिंह मरकाम (विधायक, पाली-तानाखार), जयसिंह अग्रवाल (पूर्व कैबिनेट मंत्री), डॉ. पवन सिंह (अध्यक्ष, जिला पंचायत), संजुदेवी राजपूत (महापौर), सेवकराम मरावी (जिलाध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज), सिमरनजीत कौर (पार्षद, वार्ड क्रमांक 28), समस्त जनपद अध्यक्ष, पार्षद, जिला पंचायत सदस्य, समाज प्रमुख, आदिवासी, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, और सभी सरपंच शामिल होंगे।
आदिवासी संस्कृति का उत्सव
आदिवासी शक्तिपीठ बुधवारी को विश्व की प्रथम आदिवासी शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है, जो आदिवासी संस्कृति को संरक्षित और प्रचारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम न केवल आदिवासी संस्कृति को प्रदर्शित करेगा, बल्कि युवाओं को कैरियर और उद्यमशीलता के अवसरों से जोड़कर सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देगा।








