कोरबा, 11 अगस्त 2025: कोरबा जिले के कटघोरा वन मंडल के घने जंगल अब हाथियों का स्थाई ठिकाना बनते जा रहे हैं। पहले पड़ोसी राज्यों से प्रवास कर वापस लौटने वाले हाथी अब लेमरू हाथी रिजर्व और हसदेव अरण्य के जंगलों में स्थाई रूप से बस गए हैं। पड़ोसी राज्यों में जंगलों के सिमटने के कारण कटघोरा के घने जंगल, जहां भोजन और पानी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, हाथियों को आकर्षित कर रहे हैं।
वर्तमान में कटघोरा वन मंडल में 45 हाथियों का झुंड एक साथ विचरण कर रहा है। बीती रात यह दल बाझीबन गांव पहुंचा, जहां इसने दो दर्जन से अधिक किसानों की खड़ी फसलों को रौंद डाला। हाथियों की चहलकदमी और चिंघाड़ से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वन विभाग के लिए इनकी मौजूदगी और मानव-हाथी द्वंद को रोकना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
हाथियों की आवाजाही और सतर्कता
कटघोरा वन मंडल के पसान, कोरबी और केंदई रेंज में हाथियों की लगातार आवाजाही देखी जा रही है। घने जंगलों में भोजन और पानी की उपलब्धता के कारण यह क्षेत्र उनके लिए अनुकूल बन गया है। वन विभाग ने ग्रामीणों को जंगल के आसपास न जाने और सतर्क रहने की हिदायत दी है। बाझीबन में फसलों को नुकसान की सूचना के बाद वन विभाग की टीम हाथियों की लोकेशन पर नजर रख रही है और लगातार मॉनिटरिंग कर रही है।
कुमार निशांत, डीएफओ, कटघोरा ने बताया कि प्रभावित किसानों की फसलों का सर्वे किया जा रहा है ताकि उन्हें मुआवजा प्रदान किया जा सके। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के विचरण क्षेत्र में न जाएं और सावधानी बरतें।
करंट से हाथियों की मौत, जनहानि भी चिंता का विषय
हाथियों से बचने के लिए कुछ ग्रामीण खेतों में करंट लगाने जैसे खतरनाक तरीके अपना रहे हैं, जिससे कटघोरा वन मंडल में दो से तीन हाथियों की मौत हो चुकी है। एक मामले में बिजली विभाग का हाई टेंशन तार नीचे झूलने के कारण हाथी की मौत हुई थी। इसके अलावा, वनांचल में वनोपज के लिए जंगल में जाने वाले ग्रामीणों का हाथियों से सामना होने पर जनहानि के मामले भी सामने आए हैं। वन विभाग का कहना है कि ऐसी घटनाओं के बाद मुआवजा प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाती है।
छत्तीसगढ़ में हाथियों का इतिहास
हाथी प्रबंधन विशेषज्ञ प्रभात दुबे के अनुसार, छत्तीसगढ़ में हाथी 1930 तक मौजूद थे, लेकिन इसके बाद वे गायब हो गए। साल 1986 में फिर से उनकी वापसी हुई और 2000 के बाद से उनकी स्थाई मौजूदगी देखी जा रही है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 250 से 300 हाथी हैं, और उनकी संख्या स्थिर बनी हुई है। दुबे ने बताया कि हाथी एक बार में एक ही बच्चे को जन्म देते हैं और अगला जन्म पांच साल बाद होता है, जिसके कारण उनकी संख्या तेजी से नहीं बढ़ती।
चुनौती और समाधान
कटघोरा के जंगलों में हाथियों की बढ़ती मौजूदगी और मानव-हाथी द्वंद को रोकना वन विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण है। ग्रामीणों की सुरक्षा और फसलों की रक्षा के लिए सतर्कता, मॉनिटरिंग और जागरूकता के साथ-साथ दीर्घकालिक उपायों की जरूरत है।








