कोरबा। शहर के मध्य स्थित अंग्रेजी शराब दुकान अब शांति भंग का कारण बनती जा रही है। मोतीसागर पारा और सीतामणी क्षेत्र नशे और नशेड़ियों के जमावड़े के लिए कुख्यात होने लगे हैं। स्थानीय लोग, व्यापारी और समाजसेवी संगठनों ने कई बार प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
नशे का बढ़ता दायरा
शहर में सूंघने वाला नशा करने वाले छोटे बच्चों से लेकर किशोर और युवाओं तक नशे की गिरफ्त में हैं। गांजा, नशीली गोलियां और मधु मुनक्का का नशा भी बढ़ गया है। इसके अलावा शराब दुकान से वैध और अवैध शराब की सहज उपलब्धता ने स्थिति और बिगाड़ दी है।
शराबियों का जमघट और असुरक्षा का माहौल
शराब दुकान के आसपास सुबह से रात तक शराबी खुलेआम शराब पीते दिखते हैं। पास ही बस स्टैंड, गलियों और ठेलों के पास भीड़ लगी रहती है। स्थानीय लोग विरोध करते हैं तो उन्हें ही अपमान झेलना पड़ता है। स्थिति यह है कि यहां रोज विवाद और अशांति का खतरा बना रहता है। मंदिरों और स्कूलों के पास शराब दुकान होने से धार्मिक और शैक्षणिक माहौल भी प्रभावित हो रहा है।
शिकायतें अनसुनी, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
व्यापारी और अमनपसंद लोगों ने चेम्बर ऑफ कॉमर्स, मध्य नगरी व्यापारी संघ से लेकर जिला प्रशासन और मंत्री लखनलाल देवांगन तक गुहार लगाई, लेकिन अभी तक राहत नहीं मिली है। वार्ड 13 और 6 के अंतर्गत आने वाला यह क्षेत्र दिग्गज जनप्रतिनिधियों का भी निवास स्थान है, फिर भी आवाज बुलंद नहीं हो रही है।
शनिवार रात का उपद्रव
30 अगस्त की रात शराब दुकान के पास तीन नशेड़ी युवकों ने स्कूटी सवार युवक से मारपीट कर दी और उसकी गाड़ी तोड़ डाली। यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, जिससे लोगों में दहशत है।
स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों की मांग है कि शराब दुकान को शहर से बाहर स्थानांतरित किया जाए। निगम क्षेत्र में सरकारी जमीन पर स्थायी दुकान बनाने का सुझाव भी दिया गया है, जिससे सरकार का किराया बचेगा और शहर में शांति बनी रहेगी।








