कोरबा। लेमरू रेंज में एक स्थानीय किसान को अपने खेत में दोपहर करीब 2 बजे एक गड्ढे में हलचल दिखाई दी, जिसमें एक विशालकाय किंग कोबरा (पहाड़ चित्ती) मौजूद था। किसान ने तत्काल वन विभाग को सूचित किया, जिसके बाद कोरबा वनमंडल की टीम और नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी के विशेषज्ञ हरकत में आए।
वनमण्डलाधिकारी मयंक अग्रवाल के मार्गदर्शन में जितेंद्र सारथी, मयंक बागची और बबलू मारुवा ने वैज्ञानिक प्रक्रिया और सुरक्षा के साथ किंग कोबरा को रेस्क्यू किया। साँप को सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। इस अभियान में वन विभाग के याज्ञवल्क्य राणा, विकास बनर्जी, रामेश्वर सीदार, वनपाल श्रवण कुमार गायकी, वनरक्षक जय कंवर, शिवनारायण बिंझवार और सुखसागर सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
घटनास्थल पर विधिवत पंचनामा तैयार किया गया और ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण, कानूनी जिम्मेदारियों और मानवीय कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि वन्यजीवों की उपस्थिति पर घबराने के बजाय वन विभाग को तुरंत सूचित करें।
वनमण्डलाधिकारी मयंक अग्रवाल ने कहा, “किंग कोबरा जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण हमारी पर्यावरणीय जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे रेस्क्यू अभियान जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देते हैं।”
यह रेस्क्यू अभियान वन विभाग, नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी और स्थानीय समुदाय के समन्वय का शानदार उदाहरण है, जो छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।








