कोरबा, छत्तीसगढ़: कोरबा जिले के हरदीबाजार थाना क्षेत्र के रलिया गांव की 22 वर्षीय पुष्पांजलि महंत की कथित तौर पर दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले ने महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के मोरवा में हुई इस घटना के बाद परिजनों ने पुलिस और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ आक्रोश जताया।
पुष्पांजलि के पिता उमेद दास नार्दन कोलफील्ड्स लिमिटेड, सिंगरौली में कार्यरत थे, जिनका हाल ही में निधन हो गया। उनकी मां अनुकंपा नियुक्ति पर नौकरी कर रही हैं, और पुष्पांजलि उनके साथ रहती थी। तीन दिन पूर्व हुई इस घटना के बाद पुष्पांजलि का शव मोरवा के एक अस्पताल के बाहर पड़ा रहा, लेकिन स्थानीय डॉक्टरों ने शव खराब होने का हवाला देकर पोस्टमॉर्टम करने से इनकार कर दिया। इसके बाद शव को रीवा मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया, जहां यह सोमवार देर रात पहुंचा।
परिजनों का आरोप है कि मोरवा पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और दुष्कर्म के आरोप को दर्ज करने से इनकार कर दिया। पुलिस पर दोषियों को बचाने और परिजनों को थाने से भगाने के भी गंभीर आरोप लगे हैं। चार दिन बीतने के बावजूद न तो पोस्टमॉर्टम हुआ और न ही मामले में ठोस कार्रवाई हुई। नाराज परिजनों ने पुष्पांजलि का शव एंबुलेंस से हरदीबाजार के अमगांव चौराहे पर लाकर प्रदर्शन किया और त्वरित जांच व दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
मोरवा थाना पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह घटना पुलिस और प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करती है, जिसने पीड़ित परिवार के दर्द को और बढ़ा दिया।








