रायपुर, 22 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को रायपुर की विशेष पीएमएलए कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर रायपुर सेंट्रल जेल भेज दिया है। मंगलवार को पांच दिन की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) रिमांड खत्म होने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया था। ईडी ने चैतन्य पर 2,161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के तहत 16.7 करोड़ रुपये की अवैध आय प्राप्त करने का आरोप लगाया है।
भिलाई में जन्मदिन पर छापेमारी और गिरफ्तारी
18 जुलाई को, चैतन्य बघेल के जन्मदिन के दिन, ईडी ने भिलाई स्थित उनके निवास पर छापेमारी कर उन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। छापेमारी के दौरान चैतन्य के कथित असहयोग के बाद नए सबूतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी के दौरान भिलाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ईडी की गाड़ी के सामने हंगामा किया और रायपुर में पचपेड़ी नाका स्थित ईडी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने राजीव गांधी चौक पर पुतला दहन भी किया।
16.7 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
ईडी के वकील सौरभ पांडेय ने कोर्ट में बताया कि चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से प्राप्त 16.7 करोड़ रुपये का उपयोग अपनी रियल एस्टेट फर्मों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया। जांच में पता चला कि चैतन्य ने स्थानीय व्यवसायी त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ सांठगांठ कर उनकी कंपनियों के कर्मचारियों के नाम पर “विट्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैट खरीदने के नाम पर 5 करोड़ रुपये की अवैध राशि हासिल की। बैंकिंग लेनदेन के विश्लेषण से पता चला कि त्रिलोक को शराब सिंडिकेट से उनके खातों में भुगतान प्राप्त हुआ था।
हवाला और रियल एस्टेट में निवेश
ईडी ने दावा किया कि चैतन्य बघेल ने पप्पू बंसल, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, और दीपेंद्र चावड़ा के माध्यम से शराब घोटाले की राशि को हवाला कारोबारियों की मदद से विभिन्न राज्यों में निवेश किया। जांच में दुर्ग की बघेल बिल्डकॉन और बिलासपुर की विट्ठल ग्रीन्स कंपनियों को भी शामिल किया गया है। ईडी को एक पेन ड्राइव मिला, जिसके आधार पर पप्पू बंसल और दीपेंद्र चावड़ा से पूछताछ की गई। एजेंसी का कहना है कि इस नेटवर्क के जरिए लगभग 1,070 करोड़ रुपये को सफेद करने की कोशिश की गई, जिसमें अनवर ढेबर द्वारा दीपेंद्र को दिए गए शराब घोटाले के पैसे भी शामिल हैं।
भूपेश बघेल का जवाब
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि ईडी की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और इसका मकसद कांग्रेस द्वारा विधानसभा में “अवैध वृक्ष कटाई” के मुद्दे को उठाने से ध्यान भटकाना है। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है, और हम जांच में पूरा सहयोग करेंगे।”
घोटाले का दायरा और अन्य गिरफ्तारियां
ईडी के अनुसार, यह शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब भूपेश बघेल की सरकार सत्ता में थी। इस दौरान आबकारी विभाग, नेताओं, और कारोबारियों के एक गिरोह ने अवैध शराब बिक्री से 2,161 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। जांच में घोटाले की राशि 3,200 करोड़ रुपये तक होने का अनुमान है। अब तक 205 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई है, और कई बड़े नेता व अधिकारी जेल में हैं। इस मामले में अनवर ढेबर, पप्पू बंसल, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, और दीपेंद्र चावड़ा सहित कई आरोपी पहले से हिरासत में हैं।
आगे की जांच
चैतन्य बघेल की 14 दिन की न्यायिक रिमांड के दौरान ईडी अन्य सबूतों की पड़ताल करेगी। जांच एजेंसी का कहना है कि इस घोटाले की जड़ें गहरी हैं, और नए सबूतों के आधार पर और भी खुलासे हो सकते हैं।








