बिना अनुमति पंडाल और स्वागत द्वार पर हाई कोर्ट की सुनवाई, नई गाइडलाइंस तक पुराने नियम लागू

बिलासपुर, 22 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में त्योहारी सीजन के दौरान सड़कों पर बिना अनुमति के पंडाल और स्वागत द्वार लगाने की याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की डिवीजन बेंच ने शासन को नई गाइडलाइंस तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय देते हुए आदेश दिया कि जब तक नई गाइडलाइंस लागू नहीं होतीं, तब तक वर्तमान अनुमति नियम प्रभावी रहेंगे।

छत्तीसगढ़ शासन के गृह (पुलिस) विभाग के 22 अप्रैल 2022 के आदेश के अनुसार, धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक या अन्य आयोजनों के लिए जिला प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। यह नियम धरना, जुलूस, रैली, प्रदर्शन, भूख हड़ताल और अन्य आयोजनों पर लागू होता है, ताकि आवागमन, बाजार व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी, रायपुर निवासी, ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2022, 2023 और 2024 में रायपुर में गणेश और दुर्गा पूजा पंडालों के लिए न तो कलेक्टर कार्यालय और न ही नगर पालिका निगम से कोई अनुमति ली गई। दोनों कार्यालयों ने लिखित में पुष्टि की है कि इन वर्षों में कोई अनुमति जारी नहीं की गई। सिंघवी ने कहा कि त्योहारी सीजन में सकरी सड़कों पर बिना अनुमति के पंडाल और आयोजन होने से सड़क जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनती है, खासकर जहां पार्किंग की सुविधा भी नहीं होती।

कोर्ट ने शासन की ओर से मांगे गए अतिरिक्त समय को मंजूर करते हुए कहा कि नई गाइडलाइंस कई विभागों के सहयोग से तैयार की जा रही हैं। तब तक आयोजनों के लिए मौजूदा नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। यह मामला शहर में व्यवस्था और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।