आस्था और भक्ति की रौशनी से दमका हिंगलाजगढ़: ५ शक्तिपीठों सहित ७ अखंड ज्योतियां प्रतिष्ठित, जनजातीय समाज बने यजमान

कोरबा। आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर कोरबा जिले के सुदूर वनांचल देवपहरी का हिंगलाजगढ़ जनआस्था और भक्ति का अनुपम केंद्र बन गया। यहां देश के प्रमुख पांच शक्तिपीठों—वैष्णो देवी, कामाक्षी देवी, कामाख्या, कालिका देवी पावागढ़ और शारदा देवी—के साथ-साथ सिद्धिदात्री देवी तथा बलूचिस्तान की हिंगलाज देवी की अखंड ज्योतियों की प्रतिष्ठा की गई। यह आयोजन नवरात्र पर्व पर अभूतपूर्व उत्साह के साथ संपन्न हुआ, जिसमें स्थानीय जनजातीय समाज ने प्रमुख भूमिका निभाई।
शारदीय नवरात्रि २०२५ की शुरुआत २२ सितंबर से हो चुकी है, जो १ अक्टूबर तक चलेगी। इस पावन अवसर पर देवपहरी अंचल शक्ति उपासना का प्रतीक बन गया। भक्तों ने उत्तर से वैष्णो देवी, दक्षिण से कामाक्षी देवी, पूर्व से कामाख्या, पश्चिम से कालिका देवी पावागढ़ और मध्य भारत से शारदा देवी की अखंड ज्योतियां लाने का दायित्व निभाया। सेवाभावी भक्तों ने इन ज्योतियों को सिर पर धारण कर २० किलोमीटर की पैदल यात्रा तय की। गढ़ उपरोड़ा में विश्राम के बाद सुबह यात्रा देवपहरी पहुंची, जहां गौमुखी सेवा धाम परिसर में स्वागत हुआ।
हिंगलाजगढ़ में घटस्थापना और जवारा पूजन के बाद शक्तिपीठों से लाई गई अखंड ज्योतियों की स्थापना की गई। पारंपरिक रूप से हिंगलाज देवी की पूजा करने वाले पारस बैग और संपत बैगा ने रीति-रिवाजों का पालन कराया। अनुष्ठान का संचालन पंडित रमाकांत पांडे और पंडित विष्णु शंकर मिश्रा ने किया। देवी भक्ति गीतों की धुन पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
जनजातीय समाज की प्रमुख भागीदारी
इस वर्ष का आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि मुख्य यजमान के रूप में कोरवा, पंडो, बिरहोर, मंझवार, कंवर और गोंड़ जनजातीय समाज के प्रतिनिधि सपत्नीक शामिल हुए। इससे स्थानीय आदिवासी संस्कृति और हिंदू परंपराओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला। गौमुखी सेवा धाम के प्रबंधकों ने बताया कि यह प्रयास क्षेत्रीय एकता को मजबूत करने का माध्यम बनेगा।
कोरबा जिले में इस नवरात्र पर कुल ३०,००० से अधिक ज्योति कलश जलाए जाएंगे, जिसमें हिंगलाजगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थल प्रमुख हैं। भक्तों का मानना है कि इन अखंड ज्योतियों से क्षेत्र में समृद्धि और शांति का वास होगा।